Independence Day 15 August Essay

Happy Independence Day-15 August 2018

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India got freedom from British rule on 15 August 1947, since then India celebrates its Independence Day on 15 August. People share their thought, believes and provide tribute to all the freedom fighters and nationalists who gave up their life and scarifies on the name of Nation.

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Independence Day 15 August
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Essay on Independence Day in Hindi – Independence Day 15 August Essay in Hindi

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ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने की वजह से भारत में स्वतंत्रता दिवस सभी भारतीयों के लिये एक महत्वपूर्णं दिन है। हम इस दिन को हर साल 15 अगस्त 1947 से मना रहे है। गांधी, भगत सिंह, लाला लाजपत राय, तिलक और चन्द्रशेखर आजाद जैसे हजारों देशभक्तों की कुर्बानी से स्वतंत्रत हुआ भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रुप में गिना जाता है।

आजादी के इस पर्व को सभी भारतीय अपने-अपने तरीके से मनाते है, जैसे उत्सव की जगह को सजाना, फिल्में देखकर, अपने घरों पर राष्ट्रीय झंडे को लगा कर, राष्ट्रगान और देशभक्ति गीत गाकर, तथा कई सारे सामाजिक क्रियाकलापों में भाग लेकर। राष्ट्रीय गौरव के इस पर्व को भारत सरकार द्वारा बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली के लाल किले पर झंडा फहराया जाता है और उसके बाद इस उत्सव को और खास बनाने के लिये भारतीय सेनाओं द्वारा परेड, विभिन्न राज्यों की झांकियों की प्रस्तुति, और राष्ट्रगान की धुन के साथ पूरा वातावरण देशभक्ति से सराबोर हो उठता है। राज्यों में भी स्वतंत्रता दिवस को इसी उत्साह के साथ मनाया जाता है जिसमें राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री मुख्य अतिथी के तौर पर होते है। कुछ लोग सुबह जल्दी ही तैयार होकर प्रधानमंत्री के भाषण का इंतजार करते है। भारतीय स्वतंत्रता इतिहास से प्रभावित होकर कुछ लोग 15 अगस्त के दिन देशभक्ति से ओतप्रोत फिल्में देखते है साथ ही सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।

महात्मा गांधी के अहिंसा आंदोलन की वजह से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को खूब मदद मिली और 200 साल के लंबे संघर्ष के बाद ब्रिटिश शासन से आजादी मिली। स्वतंत्रता के लिये किये गये कड़े संघर्ष ने उत्प्रेरक का काम किया जिसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपने अधिकारों के लिये हर भारतीय को एक साथ किया, चाहे वो किसी भी धर्म, वर्ग, जाति, संस्कृति या परंपरा को मानने वाले हो। यहां तक कि अरुणा आसिफ अली, एनी बेसेंट, कमला नेहरु, सरोजिनी नायडु और विजय लक्ष्मी पंडित जैसी महिलाओं ने भी चुल्हा-चौका छोड़कर आजादी की लड़ाई में अपनी महत्वपूर्णं भूमिका अदा की।

15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश साम्राज्य से भारत की स्वतंत्रता को याद करने के लिये राष्ट्रीय अवकाश के रुप में इस दिन हर साल भारत के लोगों द्वारा स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। इस दिन, भारत के उन महान नेताओं को श्रदा्ंजलि दी जाती है जिनके नेतृत्व में भारत के लोग सदा के लिये आजाद हुये। 15 अगस्त के दिन को लोग अपने-अपने अंदाज में मनाते है कोई मित्रों और परिवारों के साथ इस दिन को यादगार बनाता है तो कोई देशभक्ति गानों और फिल्मों को देख झूमता है साथ ही कई ऐसे भी होते है जो इस दिन कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर तथा विभिन्न माध्यमों के द्वारा स्वतंत्रता दिवस के महत्व को प्रचारित-प्रसारित करते है।

15 अगस्त 1947, स्वतंत्रता की प्राप्ति के बाद जवाहर लाल नेहरु भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने जिन्होंने दिल्ली के लाल किले पर भारतीय झंडा फहराने के बाद भारतीयों को संम्बोधित किया। इसी प्रथा को आने वाले दूसरे प्रधानमंत्रीयों ने भी आगे बढ़ाया जहां झंडारोहण, परेड, तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि हर साल इसी दिन आयोजित होते है। कई लोग इस पर्व को अपने वस्त्रों पर, घर तथा वाहनों पर झंडा लगा कर मनाते है| 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को अपने भाषण “’ट्रिस्ट वीद डेस्टिनी”, के साथ पंडित जवाहर लाल नेहरु ने भारत की आजादी की घोषणा की। साथ ही उन्होंने अपने भाषण में कहा कि, वर्षों की गुलामी के बाद ये वो समय है जब हम अपना संकल्प निभाएंगे और अपने दुर्भाग्य का अंत करेंगे।

भारत एक ऐसा देश है जहां करोड़ों लोग विभिन्न धर्म, परंपरा, और संस्कृति के एक साथ रहते है और स्वतंत्रता दिवस के इस उत्सव को पूरी खुशी के साथ मनाते हैं। इस दिन, भारतीय होने के नाते, हमें गर्व करना चाहिये और ये वादा करना चाहिये कि हम किसी भी प्रकार के आक्रमण या अपमान से अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिये सदा देशभक्ति से पूर्णं और ईंमानदार रहेंगे।

भारत में स्वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश के रुप में मनाया जाता है जब भारतीय ब्रिटिश शासन से अपने राष्ट्र की स्वतंत्रता की लंबी गाथा को याद करते है। ये आजादी मिली ढ़ेरों आंदोलनों और सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों की आहुतियों से। आजादी के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरु भारत के पहले प्रधानमंत्री बने जिन्होंने दिल्ली के लाल किले पर झंडा फहराया।

इस दिन को शिक्षक, विद्यार्थी, अभिवाहक और सभी लोग झंडारोहण के साथ राष्ट्रगान कर मनाते हैं। हमारा तिरंगा झंडा भारत के प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली के लाल किले पर भी फहराया जाता है। इसके बाद राष्ट्रीय ध्वज को 21 बंदूकों की सलामी के साथ उस पर हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा कर सम्मान दिया जाता है। हमारे तिरंगे झंडे में केसरिया हिम्मत और बलिदान को, सफेद रंग शांति औ सच्चाई को तो वहीं हरा रंग विश्वास और शौर्य को प्रदर्शित करता है।

हमारे तिरंगे के मध्य एक अशोक चक्र होता है जिसमें 24 तिलियाँ होती है। इस खास दिन पर हम भगत सिंह, सुखदेब, राजगुरु गांधीजी जैसे उन साहसी पुरुषों के महान बलिदानों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके अविस्मरणीय योगदानों के लिये याद करते है। इस दौरान स्कूलों में विद्यार्थी स्वतंत्रता सेनानियों पर व्याख्यान देते हैं तथा परेड में भाग लेते हैं। इस खास मौके को सभी अपनी-अपनी तरह मनाते है,कोई देशभक्ति की फिल्में देखता है तो कोई अपने परिवार और मित्रों के साख बाहर घूमने जाता है साथ ही कुछ लोग स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।

Short Essay on Independence Day in English

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It was on this day in 1947 that India became independent. We won freedom after a hard struggle. On this day our first Prime Minister Pundit Jawaharlal Nehru unfurled The National Flag at The Red Fort for the first time.

All the people irrespective of their caste, look and creed celebrate this day every year amidst great rejoicing. It is declared a public holiday. On this day we take a pledge to defend our freedom with all our might.

The Independence Day is celebrated all over India with great joy. People hold meetings. Fly the tricolor and sing the national anthem. There are great enthusiasms among them.

In Delhi, the capital of India, this day is celebrated with great pomp and show. People gather in large numbers into the parade ground in front the red fort. There is a great hustle and bustle everywhere. They line up the roads all leading to the fort and eagerly wait for the arrival of the Prime Minter.

The foreign ambassadors and dignitaries also partipcate in the celebrations. The prime minster unfurls the national flag. A guard of honor is given by the local police and armed forces personnel. A salute of 21 guns is fired. The military band plays the national anthem. The Prime Minister greets the ambassadors seated at the parapet and delivers a speech.

Homage is paid to those who sacrificed their lives for the freedom of our country. After the Prime Minister’s speech, the functions come to an end with the recital of our national anthem, ‘Jan Gina Manna’ and the crowd begins to melt away.

India was under the British rule for a long time. We fought for our freedom and got it on 15 August 1947. So 15 August is our Independence Day. We have been observing this as our national day. This day reminds us of the sacrifice of our freedom fighters. We got freedom because of our united strength. We celebrate this day all over the country. Parades are conducted in New Delhi and the state capitals. The Prime Minister of our country hoists our national flag on the Red Fort on this occasion. It is a day of merriment for every Indian.

On 15th August 1947, India became free. Since the day is celebrated as Independence Day. On this day street of every city are decorated with national flags. A large number of Children, men, women, gather near the Red Fort. Exactly at seven thirty in the morning, our tricolour national flag is unfurled from the walls of the Red Fort. This is saluted by the firing of thirty-one guns. After this, our Prime Minister gives a message to the nation. The programme ends with cries of Jai Hind and the singing of Jana Gana Mana, our national song. The fifteenth of August makes us remember how lakhs of people gave their lives in the long fight for the independence of India. We could always be ready to give our everything to make our country rich and prosperous.. We should never think of anything which may bring danger to our independence.

Essay on Independence Day in Marathi

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आपल्या प्रिय भारत देशाला इंग्रजी राजवटीच्या पारतंत्र्यातून १५ ऑगष्ट१९४७ ला स्वातंत्र्याच्या पवित्र्यतेचे श्रेय मिळाले. आपल्या पिढीतल्या कोणत्याही दृष्टीने १९४७ हे साल म्हणजे ऐतिहासिक साल होय. या एतिहासिक सालाच्या पवित्र घटनाच्या पावन स्मृती आपण कायम ठेवल्याच पाहिजेत. आणि कर्तव्य बुद्धीने आपण दरवर्षी १५ ऑगष्ट्ला “स्वातंत्र्य दिन” म्हणून साजरा करतो.

माणूस असो वा देश असो स्वातंत्र्या सारखे दुसरे सुख नाही. हे जाणूनच भारतीय स्वातंत्र्यासाठी अनेकांनी आपले प्राण पणाला लावून प्रयत्न केले. या प्रयत्नाचे प्रत्येकाचे मार्ग वेगवेगळे असले तरी त्यामार्गांचे ध्येय एकच होतेआणि ते म्हणजे भारताचे स्वातंत्र्य! इंग्रजांनी दीडशे वर्ष भारतात राज्य केले. तेवढ्या काळात आमचा ईतिहास, आमचा पराक्रम, आमचा स्वाभिमान नष्ट करण्याचेच काम त्यांनीकेले. भारतात शिक्षणाचा प्रचार करण्याचा देखावा निर्माण करून भारतीय तरुंनाना पोटभरू कारकून बनविणे एवढीच त्या शिक्षणाची मर्यादा होती. तलम कापडाचे आकर्षण निर्माण करून आमच्या शेतकर्यांना लुबाडले. स्व:त मालकीच्या चहाच्या मळ्यांची भरभराट साधण्यासाठी भारतीयांना चहाचे व्यसन लावले. असा अनेक प्रकारे भारतीयांना लुबाडले.

इंग्रजांचा कावेबाजपणा ओळखणार्या काहींनी त्यांच्या विरुद्ध शस्त्र उगारले. १८५७ स्वातंत्र्यसमर तात्या टोपे, झाशीची राणी लक्ष्मीबाई,नाना साहेब पेशवे यांनी गाजविले. पुढे सशस्त्र उठाव करून वासुदेव बलवंत फडके, क्रांतिवीर भगतसिंग, राजगुरू, चंद्रशेखर आझाद, चाफेकर बंधू इ. आपला निषेध शस्त्रांन द्वारे नोंदविला.काहींनी इंग्रज अधिकाऱ्यांची हत्या केली. स्वातंत्र्यवीर सावरकर, धिंग्रा यांनी तसेच प्रयत्न केले. लोकजागृती झाली, पण ती दडपली गेली. रानडे, टिळक,गोखले,आगरकर यांनी लेखणीचे आणि वाणीचे सामर्थ वापरून इंग्रजांकडून होणारा अन्याय आणि जुलूम यांची जनतेला जाणीव करून दिली. भारतीय समाजाला आपली स्थिती सुधारण्याची प्रेरणा, जाणीव करून दिली. फुले इ. च्या शिकवणीने जातीयभेदाभेद किती वाईट आहे व त्याने समाज कसा दुर्बल होतो हे लोक शिकले.

कित्येक क्रांतीकारी फासावर गेले. टिळकांनी, सावरकरांनी आणि अशा अनेक क्रांतीवीरांनी तुरुंगवासातच उमेद घालविली. परंतु इंग्रजांनी यावर अधिकारपदे, मोठमोठ्या पदव्या, हक्क नसलेल्या कमिट्या यांच्या उपायांनी भारतातील जनतेत फुटाफुट निर्माण केली. फोडा आणि झोडा हे त्यांनी त्यांची सत्ता कायम ठेवण्यासाठी वापरलेले तंत्र होते. पुढे महात्मा गांधीच्या कडे देशाचे नेतृत्व आल्यावर पूर्वीच्या प्रयत्नांचा उपयोग होत नाही, असे पाहून त्यांनी सत्याग्रहाच्या व अहिन्स्तेच्या मार्गाने जाण्याचा संदेश त्यांनी जनतेला दिला. त्याबरोबरच स्वदेशी, स्वालंबन, असहकार अश्या मार्गांनी सर्वत्र भारतीयांना इंग्रजां विरुद्ध आंदोलन करायला शिकविले. सरकारी जुलमी कायदे, अन्याय, नोकऱ्या यान विरुद्धसत्याग्रहाची मोहीम सुरु केली. गांधीजींना जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल, मौलाना आझाद इ.सहकार्य केले. सुभाषचंद्र बोस यांनी मोठ्या धाडसाने इंग्रजांच्या विरोधात “आझाद हिंद फौज” उभी केली.

अश्या प्रकारे अनेकांनी भिन्न भिन्न मार्गाने व अनेकांच्या बलिदानाने हे स्वातंत्र्य मिळविले गेले आहे.आपल्या पिढीचा स्वतंत्र्य भारतात जन्म झाला आहे. आता भारताचे स्वातंत्र्य टिकविण्याचे काम आपल्याला करायचे आहे ते केलेच पाहिजे! त्यासाठी १५ ऑगष्ट हा दिवस आपण पवित्र सणा सारखा साजरा केला पाहिजे. आजच्या दिवशी आपण काही चांगले निश्चय करून देश हिताचे काम करायची शपथ घेतली पाहिजे. ध्वजवंदन करताना त्यापवित्र ध्वजाच्या साक्षीने हि शपथ घ्यायची असते.

आपले मुख्य अतिथी ध्वज फडकविल्यांनंतर जन- गण- मन हे राष्ट्र गीत म्हणून नंतर सर्वांनी ‘सावधान’ तेच्या पावित्र्यात झेंडा उच्या रहे हमारा’ हे गीत सामुदाईकपणे म्हणायचे असते. देशा साठी प्राण पणाला लावलेल्या क्रांती वीरांची आठवण करून देणारे हे गीत म्हणजे —– स्वर साम्राज्ञी लतादीदी च्या स्वरातील हे गीत एकल्या नंतर खरच त्या क्रांतीवीरांसाठी आपल्या भावनांना पाझर फुटते .. त्यांना आम्हा सर्वांचे शत शत: प्रणाम ! जय हिंद, जय भारत

१५ ऑगस्ट १९४७ साली भारताला स्वातंत्र्य मिळाले. ब्रिटीशांच्या गुलामगिरीच्या जोखडातून भारत मुक्त झाला. आपले स्वत:चे संघ राज्य निर्माण झाले. जगाच्या नकाशात भारत एक स्वतंत्र देश म्हणून ओळखला जाऊ लागला. १५० वर्षे आपण अनंत यातना हालअपेष्टा सहन केल्या. कित्येकांना फाशी दिली गेली. कित्येकाना तुरुंगवास भोगावा लागला. १८५७ पासून आपण ब्रिटीश राजवटी विरुद्ध युद्ध करीत होतो. लाखो राष्ट्रभक्तांना युद्धाच्या यज्ञ कुंडात प्राणांची आहुती द्यावी लागली. कित्येक संसार नष्ट झाले. इतक्या लोकांच्या बलिदानामुळे भारत हा सोनियाचा दिवस पाहू शकला. यूनियन जॅक खाली उतरला आणि तिरंगा लाल किल्ल्यावर डौलाने फडकू लागला. किती रोमहर्षक क्षण असेल तो!

त्या दिवसाची आठवण आणि स्वातंत्र्याचा वाढदिवस म्हणून आपण हा स्वातंत्र्या दिन साजरा करतो. स्वातंत्र्य मिळाल्यावर आपण आपली अशी एक राज्य पद्धती अमलात आणली. आपले संघराज्य निर्माण झाले .त्यामध्ये लोकांनी निवडलेले लोक प्रतिनिधी कारभार करणार होते. आता कोणी राजा नाही आणि कोणी प्रजा! हे लोकांनी, लोकांसाठी चालवलेले राज्य आहे. बाबासाहेब आंबेडकर यांनी या संघराज्याची घटना लिहिली. त्याप्रमाणे आपले कायदेकानून आपण बनविले.

धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र :

भारतात सर्व धर्माचे लोक तेव्हाही राहत होते, आताही गुण्यागोविंदाने राहतात . हिदू, मुस्लीम, शीख, ख्रिश्चन ,पारशी, बौद्ध, जैन आणि ज्यू सुद्धा. भारताने म्हणून सर्व धर्म समभाव अंगिकारला. आपले राष्ट्र हे सेक्युलर म्हणजे धर्म निरपेक्ष राष्ट्र म्हणून ओळखले जाऊ लागले. तसेच एक मोठा लोकशाही असलेला देश म्हणून ही आपली ओळख निर्माण झाली. बाहेरच्या जगात भारत एक प्रबळ सुधारणा वादी देश म्हणून मान्यता पावला. जगाला आपली दाखल घ्यावी लागली. भारताची सहिष्णुता, अहिंसा आणि न्याय ह्या तत्वांचे जगात स्वागत झाले. त्यामुळे सर्व जगाशी आपले मैत्रीत्वाचे संबंध प्रस्थापित झाले.

१५ ऑगस्टचा सोहळा :

१५ ऑगस्टच्या पूर्व संध्येला म्हणजे आदल्या दिवशी आपले पंतप्रधान लाल किल्ल्यावरून राष्ट्राला संदेश देतात. त्यामध्ये आम्ही काय सुधारणा केल्या आहेत आणि काय करणार आहोत हे राष्ट्राला कळवतात. दुसर्या दिवशी सकाळी लाल किल्ल्यावर तिरंग्याचे ध्वजारोहण होते. राष्ट्रगीत होऊन प्रधानमंत्री आणि तिन्ही सैन्यदलाचे प्रमुख राजघाटावर महात्मा गांधी आणि इतर थोर राष्ट्रीय नेत्यांना श्रद्धांजली वाहतात आणि नंतर प्रमुख पाहुण्यासहित कार्यक्रमाला जातात. त्या दिवशी दिल्लीत म्हणजे आपली राजधानीत तसेच सर्व शाळांमध्ये व कॉलेजामध्ये नाच गाणी व मनोरंजनाचे कार्यक्रम होतात. लहान मुलांना झेंडे घेऊन नाचत फिरताना पाहून खूप मजा वाटते. सगळी कडे झेंडा वंदनाचे कार्यक्रम होतात.

स्वतंत्र देशांचे स्वतंत्र नागरिक म्हणून मिरवताना खूपच अभिमान वाटतो. त्या दिवशी भारत सरकार अनेक व्यक्तींना राष्टीय पुरस्कार देतात. असा हा स्वातंत्र्योत्सव आपण साजरा करीत असताना आपल्या लोकशाही देशाबद्दल पण आपल्याला गर्व वाटतो. आपली स्वतंत्र घटना आहे, आपल्या देशात न्याय संस्था आहे ह्याचा आपल्याला अभिमान वाटतो.

Essay on Independence Day in Gujarati

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Independence Day 15 August Gujrati
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Essay on Independence Day in Bengali

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Independence Day 15 August bengali
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Essay on Independence Day in Punjabi

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Independence Day 15 August punjabi
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Essay on Independence Day in Tamil

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1947, ஆகஸ்ட் மாதம் 15 ஆம் தேதி’ என்பது ஒவ்வொரு இந்தியரின் வாழ்விலும், நினைவிலும் நிற்கும் தினமாகக் கருதப்படுகிறது. அந்நாள், ‘நம்முடைய புதிய தேசத்தின் உதய நாள்’ மற்றும் ‘ஒரு புதிய தொடக்கத்தின் தொடக்க நாள்’ என்று சொன்னால் அது மிகையாகாது. ஏனென்றால், இறையாண்மைக் கொண்ட நாடாகத் திகழும் நமது இந்தியாவின் சுதந்திரம் என்பது, நூற்றுக்கணக்கான ஆன்மாக்கள் மற்றும் ஆயிரக்கணக்கானப் புரட்சியாளர்கள் மற்றும் தலைவர்களின் வெற்றி என்று பெருமையுடன் தலைநிமிர்ந்து சொல்லலாம். நமது தாய்நாடான இந்தியா சுதந்திரமடைந்து, சுமார் அரை நூற்றாண்டுகளையும் கடந்து, நாம் சுதந்திரமாக நமது தாய்மண்ணில் சுதந்திரக் காற்றை சுவாசித்துக் கொண்டிருக்கிறோம் என்றால் அதற்கு முதன்முதல் காரணம், நமது தேசிய தலைவர்களும், போராட்ட வீரர்களுமே! இருநூறு ஆண்டுகளாக, நமது நாட்டிலேயே நாம் அந்நிய தேசத்தவரிடம் அடிமைகளாக இருந்த போது, அவர்களை தைரியத்துடனும், துணிச்சலுடனும் பலரும் வீறு கொண்டு எதிர்த்து பல புரட்சிகளையும், கிளர்ச்சிகளையும், போர்களையும் நடத்தி, வெற்றியும், தோல்வியும் கண்டுள்ளனர். சுதந்திரம் என்ற ஒன்றை மட்டுமே கருத்தில் கொண்டு, தமது இன்னுயிரையும் துறந்த மகான்களின் தியாக உள்ளங்களையும், அவர்கள் போராடி பெற்றுத் தந்த சுதந்திரத்தை, அந்நாளில் நாம் களிப்புற கொண்டாடுகிறோம், என்றென்றைக்கும் கொண்டாடுவோம். நமது சுதந்திரத்திற்காகப் போராடிய பல தலைவர்களும், புரட்சியாளர்களும் தள்ளாடும் வயதைக் கடந்துகொண்டிருக்கும் வேளையில், சுதந்திரத்தைப் பற்றியும் அதன் வரலாற்றைப் பற்றியும் நமது இந்திய நாட்டின் பிரஜைகள் அனைவரும் தெரிந்து கொள்வது அவசியம்.

ஆரம்பகால இந்தியா

‘தீப கற்பம்’ என்றும் ‘பாரத தேசம்’ என்றழைக்கப்படும் நமது நாடானது, மேற்கே பாகிஸ்தான், கிழக்கே வங்காளதேசம், எனப் பெருவாரியானப் பரப்பளவைக் கொண்டு ஒரே நாடாக இருந்தது. மன்னர்கள் ஆட்சியில் மிகவும் செழிப்பாகவும், பசுமையாகவும் இருந்த நமது நாடு, செல்வ செழிப்பில் உலகிலுள்ள அனைத்து நாடுகளுக்கும் சிம்மசொப்பனமாக இருந்தது. தென்னிந்தியாவை சேர, சோழ, பாண்டிய மன்னர்கள் ஆட்சி செய்து, அவர்களது புகழை மேன்மேலும் ஓங்கச் செய்தனர். இவர்களைத் தொடர்ந்து, இசுலாமியர்கள் (1206–1707), தில்லி சுல்தானகம் (1206–1526), தக்காணத்து சுல்தானகங்கள் (1490–1596), விஜயநகரப் பேரரசு (1336–1646), முகலாயப் பேரரசு (1526–1803), மராட்டியப் பேரரசு (1674–1818), துர்ரானி பேரரசு (1747–1823), சீக்கியப் பேரரசு (1799–1849) எனப் பலரும் நமது நாட்டின் எல்லைகளையும், செல்வங்களையும் விரிவுபடுத்துவதிலே மிகவும் கவனமாக இருந்தனர்.

மேலைநாட்டவர்களின் வருகை

விஜயநகரப் பேரரசு காலத்தில், நமது இந்தியாவிற்குக் கடல்வழியாக முதன்முதலில் வந்தவர் தான், வாஸ்கோடகாமா. ‘வந்தோரை வாழவைக்கும் நாடெங்கள் நாடு’ என்ற பெருமை நமது இந்தியாவிற்குத் தொடக்கத்திலிருந்தே உள்ளது. ஒரு போர்ச்சுகீசியரான அவர், கடல் வழியே இந்தியாவிற்கு வழியைக் கண்டு பிடித்து, நமது நாட்டில் கால்பதித்தார். இவரது வருகையைத் தொடர்ந்து, இந்தியாவில் உணவுக்கு சுவை சேர்க்கும் கறிமசாலா பொருட்கள் இருப்பதை அறிந்த ஐரோப்பியர்கள், அதைத் தங்களது நாடுகளுக்கு விற்பனை செய்யும் வணிகத்தில் ஈடுபட எண்ணி, கோழிக்கோடு துறைமுகத்தில் 1498-ஆம் ஆண்டு வந்திறங்கினர். இதுவே, பண்டமாற்று முறைக்கு வித்திட்டது. போர்ச்சுகீசியர்கள் இந்தியாவின் கடலோரப் பகுதிகளான கோவா, டியூ, டாமன் மற்றும் பாம்பே போன்ற இடங்களில் தங்களது வாணிக முகாம்களை அமைத்தனர். இவர்களைத் தொடர்ந்து, டச், ஆங்கிலேயர்கள் போன்ற அந்நிய நாட்டவர்கள் நமது நாட்டிற்கு வருகைத் தந்ததால், அவர்களும் போர்ச்சுகீசியர்கள் போலவே வாணிக முகாம்களை அமைக்க எண்ணி, சூரத்தின் வடக்கு கரையோரத்தில் நிறுவினர். 1619 ஆம் ஆண்டில், பிரெஞ்சுகாரர்களும் அவர்களைப் பின் தொடர்ந்தனர். வாணிகம் என்ற பெயரில் ஒவ்வொரு நாட்டுக்குள்ளும் நுழையும் ஐரோப்பியர்கள், நாட்கள் செல்ல செல்ல அந்நாட்டின் சிம்மாசனப் பொறுப்பைக் கைப்பற்றுவர். அதற்கேற்றவாறு, பல நாட்டவரும் இந்தியாவுக்குள் நுழைந்ததால், பல போர்களும், குழப்பங்களும் நிலவியதால், ஐரோப்பியர்கள் அரசியல் ஆதிக்கத்தை செலுத்த ஆரம்பித்தனர். ஆனால், தாங்கள் கைப்பற்றிய அனைத்து நாடுகளையும், ஒரே நூற்றாண்டில் ஆங்கிலேயர்களிடம் இழந்தனர்.

ஆங்கிலேயர்களின் கிழக்கிந்திய கம்பெனி

ஐரோப்பியர்களை மிகவும் சூழ்ச்சியால் வென்ற ஆங்கிலேயர்கள், இந்தியாவில் இருந்து வாணிகம் செய்து வந்ததோடு மட்டுமல்லாமல், அப்போதைய முகலாயப் பேரரசர் ஜெஹாங்கிரின் அனுமதிப் பெற்ற பின்னர், இந்தியாவைத் தலைமையிடமாகக் கொண்டு அவர்களது கிழக்கிந்திய கம்பெனியையும் நிறுவினர். நாளடைவில் அவர்கள் வரி செலுத்தாமலேயே வாணிகம் செய்ததால், அவர்களை வங்காளத்தின் நவாப் ‘சிராஜ் உட துலாத்’ என்பவர் எதிர்த்ததால், 1757 ஆம் ஆண்டில், ‘பிளாசி யுத்தம்’ தொடங்கியது. இதில், நவாப் ஆங்கிலேயர்களிடம் தோல்வியுற்றதால், அவர்கள் இந்தியாவில் உள்ள நிலங்களை ஆக்கிரமிக்கத் துவங்கினர். இதையடுத்து, 1764 ஆம் ஆண்டில் பக்சார் போரிலும் வெற்றிப் பெற்று, வங்காளத்தை ஆட்சி செய்ய அப்போதைய முகலாயப் பேரரசரிடம் அனுமதிப்பெற்றதால், இந்தியா முழுவதும் ஆங்கிலேயரின் ஆட்சிக்குள் வர அதுவே, முதன்முதல் காரணமாக இருந்தது. இதன் பின்னர், வரிகள், நிலங்கள் கையகப்படுத்துதல், போன்றவற்றால் இந்தியா பஞ்சம் வரும் நிலைமைக்குத் தள்ளப்பட்டது. 20 மில்லியன் மக்கள் ‘கிரேட் பாமின் ஆஃப் 1876–78’ மற்றும் ‘இந்தியன் பாமின் ஆப் 1899–1900ல்’ மடிந்ததொடு மட்டுமல்லாமல், ‘மூன்றாம் பிளக் பாண்டமிக்’ என்ற கொடிய நோயால் மேலும் 10 மில்லியன் மக்கள் செத்து மடிந்தனர். கிழக்கிந்திய நிறுவனத்தால், ஏற்பட்ட இத்தகைய மாபெரும் இழப்பைக் கண்டு வெகுண்டத் துடிப்பான இளைஞர்கள் பலரும் இணைந்து, ‘1857 இந்திய கலகம்’ என்ற இயக்கத்தை முகாலாயப் பேரரசர் பகதூர் ஷா சபர் அவர்களை மானசீக தளபதியாகக் கொண்டு உருவாக்கினர். இதுவே, ‘முதல் இந்தியப் போர்’ என்று அழைக்கப்பட்டது. ஒரு வருடமாகப் போராடிய பின்னர், இவ்வியக்கத்தைத்

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